माँ Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps By Supriya Singh - February 03, 2020 तुम्हे आँधियों में सम्भाला है उसने, अपने भरोसे ही पाला है उसने, लुटा देगी सबकुछ, अदा क्या करोगे, "माँ " है वो साहब दया क्या करोगे। 🙏 -supriya singh Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps
Mighty marriage Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps By Supriya Singh - January 28, 2019 How free are they! just talk about marriage all the way they don't have any concerns about climate change or saving the earth all they can do, just gossip about marriage worth. -Supriya Singh Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
शिवाय By Supriya Singh - January 01, 2019 हर हर महादेव 🙏 अनाथों के नाथ दीनानाथ शम्भू हे शिवम् कृपा से तेरी जग में तर गए कई अधम हर हर हर महादेव डम डम डमरू के स्वर कर रहे प्रसार जग में जीवन का प्रतिक्षण सत चित आनंद की त्रिवेणी है त्रिशूल में उठ गई जीवन मरण से आके चरणों की धूल में शूल अँधकार के जो जीवन में थे कभी नाम मात्र से प्रभु के कण -कण बिखर गए वो सार हैं ब्रह्माण्ड के उस सार के हम अंश हैं विषधर शिवाय नीलकण्ठ रौद्राय शिव, शिव ही विध्वंस हैं थाम्ह हाथ शिव का साथ अवगत हुई खुद से आज मोह ये जगत का छोड़ मोक्ष पथ पे चल दी आज शोक भय दुःख के सार हट गए मन से परे शंकर सहाय तो भयंकर भी क्या करे " नमः शिवाय " ©सुप्रिया सिंह ... Read more
समझ By Supriya Singh - February 19, 2019 खिलखिलाहट न जाने कब मुस्कराहट में बदल गई , मस्ती मज़ाक, न जाने कब अदब में बदल गए। चँहकते दौड़ लगाना संभल कर चलना हो गया अपने ख्यालों में खोए रहना बांवरापन सा हो गया। जो कभी छोटे -छोटे से सपने थे , आज पर्वतों से ऊँचे और कठिन लगने लगे। जहाँ बिन कहे ही ज़रूरतें पूरी हो जाया करती थीं वहाँ ज़रा-ज़रा सी ख़्वाहिशों पे रोना मचने लगा। बेफिक्र अपनी बात कह देना , अब सोच समझ कर बोलना हो गया. न जाने कब सबके साथ प्यार से रहने की सीख , सोच समझ कर रिश्ते बनाने में बदल गई। सब बेपरवाह ज़ाहिर कर देना , घुट- घुट कर जीना हो गया। बिन बताए मन के काम कर लेना , आज मन मसोस कर रह जाने सा हो गया है। बस यूँ ही खुद को गवाँते,भारी कीमत चुकाते, न जाने कब हम समझदार हो गए। ©सुप्रिया सिंह Read more
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